Former Indore international umpire and first class cricketer Narendra Menon will be 75 years old know about his life

Updated: | Wed, 06 Jan 2021 07:51 PM (IST)

इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। विकेट पर खड़े होकर बल्ला चलाना और बल्ला टांगने के बाद विकेट के सामने खड़े होकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैसला सुनाना, ऐसा संयोग कम ही देखने को मिलता है। इंदौर के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अंपायर और प्रथमश्रेणी क्रिकेटर नरेंद्र मेनन यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। गुरुवार को मेनन ने जीवन के 75 बसंत पूरे किए और यह उपलब्धि हासिल करने वाले देश के सिर्फ दूसरे जीवित व्यक्ति हैं जो प्रथमश्रेणी क्रिकेटर और अंतरराष्ट्रीय अंपायर दोनों रहा हो। एस. वेंकटराघवन ही उनसे पहले ऐसे अकेले प्रथम श्रेणी क्रिकेटर और अंतरराष्ट्रीय अंपायर हैं जिसने 75 वसंत देखे हैं। उन्होंने बीते वर्ष ही यह आंकड़ा छुआ था। विकेटकीपर बल्लेबाज रहे मेनन ने खास चर्चा करते हुए बताया कि जब मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया था तब इतना पैसा और ग्लैमर नहीं था। अभी इंदौर में कैप्टन मुश्ताक अली के नाम पर देशभर की टीमें खेल रहीं हैं, उनके बेटे गुलरेज सहित नरेंद्र दुआ, बीसीसीआइ के पूर्व सचिव संजय जगदाले, अशोक जगदाले, विजय नायडू, भगवानदास सुथार और सुबोध सक्सेना जैसे क्रिकेटर साथ खेले।

‘खलनायक’ से नायक बने

इंदौर में भारत और श्रीलंका के बीच एक मैच खराब पिच के कारण रद्द हुआ था, जिसके लिए अकेले मेनन को जिम्मेदार ठहराया गया। निराश न होते हुए मेनन आगे बढ़े और पूरे परिवार के साथ इंदौर की शान बने। बड़ा बेटा नितिन देश का सर्वश्रेष्ठ अंपायर है और आइसीसी के एलीट पैनल में शामिल विश्व का सबसे युवा अंपायर भी है। छोटा बेटा निखिल भी बीसीसीआइ अंपायर है। खुद नरेंद्र मेनन ने वर्ष 2010 से 2014 तक दो कार्यकाल बतौर एमपीसीए सचिव पूरे किए। उनके सचिव रहते ही शहर को आइपीएल की सौगात मिली। पहली बार वर्ष 2011 में आइपीएल के मैच इंदौर में हुए तब वे ही एमपीसीए सचिव थे। इसी दौरान वर्ष 2011 में वीरेंद्र सहवाग ने इंदौर में दोहरा शतक लगातार रिकार्ड बनाया था।

अनुशासित जीवन युवाओं के लिए सीख

मेनन बेहद अनुशासित जीवन जीते हैं। हर मौसम में सुबह जल्दी उठकर टहलना दिनचर्या का हिस्सा है। सेहत को पूरा वक्त देते हैं। खानपान का खास ध्यान रखते हैं। वे बताते हैं कि पहला सुख निरोगी काया। युवा गैरअनुशासित दिनचर्या के चलते सेहत खराब कर लेते हैं और कई बीमारियां घेर लेती हैं। यह देखकर दुख होता है कि मैं 75 की उम्र में भी बिना लाठी के चलता हूं, लेकिन आजकल के युवा थोड़ा सा चलने पर थक जाते हैं।

सलमान के पिता सलीम के साथ खेलते थे बड़े भाई, उनको देखकर खेल में आए

नरेंद्र मेनन बताते हैं कि मेरे बड़े भाई सुरेंद्र मेनन फुटबॉलर थे और क्रिकेट भी खेलते थे। वे विक्रम विश्वविद्यालय के कप्तान थे। उन्हें देखकर ही मैं क्रिकेट से जुड़ा। उनकी और सलमान खान के पिता सलीम खान की बहुत यारी थी। सलीम खान भी बहुत अच्छे क्रिकेटर थे। उल्लेखनीय है कि सलमान खान का परिवार इंदौर से ताल्लुक रखता है। उनके परिजन आज भी इंदौर में रहते हैं।

Posted By: Navodit Saktawat

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